सुश्रुत :आधुनिक प्लास्टिक सर्जरी के जनक

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  • August 19, 2018 4:21 PM
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हमें और हमारी आने वाली पीढ़ियों को हमारे गौरवशाली इतिहास के स्वर्णिम बिंदुओं से आवश्यक रूप से रूबरू होना ही चाहिए, इस बात से प्रत्यक्ष रूप से हमें कोई फायदा होने वाला नहीं है लेकिन ये ऐसे हे आवश्यक है जैसे हमें अपने बाप दादाओं के किए गए अच्छे कार्यों को याद रखना, उनका प्रसार करना और उनके द्वारा बनाए गए रस्ते को आगे ले जाना होता है।

इस कोशिश में आज हम अपने देश के उस महान वैद्य के बारे थोड़ा सा जान लेते हैं जो पूरी दुनियां में शल्य चिकित्सा (plastic surgery) के जनक के रूप में जाने जाने चाहिए ।जिनका नाम है सुश्रुत।

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Surgery by Sushruta - symbolic image


सुश्रुत का जन्म 600 वर्ष ईसा पूर्व हुआ था।
वह वैदिक ऋषि विश्वामित्र के वंशज थे उन्होंने वैद्यक और शल्य चिकित्सा की शिक्षा वाराणसी में दिवोदास धन्वन्तरि के आश्रम में प्राप्त की थी।

वह पहले शल्य चिकत्सक थे जिन्होंने उस शल्य चिकित्सा का प्रचार किया जिसे आज हम सिजेरियन ऑपरेशन कहते हैं। वह मूत्राशय की पथरी निकलने में,टूटी हड्डियों को जोड़ने और मोतियाबिंद की शल्य चिकित्सा में विशेषज्ञ थे।

सुश्रुत से जुड़ा एक किस्सा-
एक बार आधी रात के समय किसी ने उनका दरवाजा खटखटाया। उन्होंने पूछा "कौन है"?
बाहर से किसी ने पीड़ा भरे स्वर में जबाब दिया।
"मैं एक यात्री हूँ मेरे साथ दुर्घटना घट गई है।मुझे आपसे उपचार की आवश्यकता है"
यह सुन सुश्रुत ने दरवाजा खोला और बाहर पीड़ा से कराहते हुए एक व्यक्ति को पाया जिसकी आँखों से आंसू और कटी नाक से खून बह रहा था।
सुश्रुत उसे अंदर एक स्वच्छ कमरे में ले गए जिसमें उनकी दवाएं और शल्य चिकित्सा के उपकरण दीवार पर टंगे हुए थे उन्होंने मरीज को बिठाया और दवा मिले पानी से उसका मुंह धुलवाया। उन्होंने कुछ दवा पीने को दी और उसे बिस्तर पर लिटाकर शल्य चिकित्सा की तैयारी करने लगे।

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Medical tools used by Sushruta - symbolic image


बगीचे से एक बड़ा सा पत्ता लेकर उन्होंने अजनबी की नाक नापी।उसके बाद दीवार से एक चाकू और चिमटी लेकर उन्हें आग की लौ पर गर्म किया। उसी गर्म चाकू से अजनबी मरीज के गाल से कुछ मांस काट।आदमी कराहा, लेकिन लेकिन शल्य चिकित्सा से पूर्व दी गई बेहोशी की दवा से दर्द की अनुभूति कुछ कम रही।

गाल पर पट्टी बांधकर मरीज की नाक में दो नलिकाएं डालीं।गाल से कटा हुआ माँस और दवाइयाँ नाक पर लगाकर उसे पुनः आकार दे दिया गया।फिर नाक पर घुँघची व लाल चन्दन का महीन बुरादा छिड़क कर हल्दी का रस लगा दिया गया और पट्टी बाँध दी। अंत में उसे खान पान और दवाओं की सूची दी गई जो मरीज को सप्ताह भर तक लेनी थी और दोबारा दिखाने आना था

सुश्रुत ने हजारों साल पहले जो किया उसी का विकसित रूप आज की प्लास्टिक सर्जरी है यानी तत्कालीन औजार भी थे। निश्चेतक और नशीला द्रव्य पिलाकर मरीज की पीड़ा को कम करने का नुस्खा भी था और औजारों को कीटाणु रोधी करने का भी अपना तरीका था व मरीज के प्रति सेवा भाव भी था जो आज गायब है लेकिन आज हमारी पीढ़ियां केवल इतना जानती हैं की विश्व को बर्तमान रूप देने में केवल पश्चिम का ही हाथ है। हमारे अपने नाम तो गुमनाम से हो गए हैं।




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Comments:


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Nitya kishore August 7, 2018 7:47 PM

Good knowledge


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Manoj kumar lavania August 7, 2018 8:33 PM

Good knowledge


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sunits August 8, 2018 7:09 AM

Pride of Bharat


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Pradeep Sharma August 8, 2018 10:42 AM

It's happened in India


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Sonvir Singh August 10, 2018 12:33 AM

Awesome