अयोध्या-नमाज़ मामला: क्या मस्जिद में नमाज इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है? आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

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  • September 27, 2018 3:49 PM
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Babri Masjid
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आज दोपहर 2 बजे सुप्रीम कोर्ट आयोध्या रामजन्म भूमि मामले में अपना फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट आज इस बात पर फैसला सुनाया कि मस्जिद में नमाज़ पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है। कोर्ट ने तय किया कि 1994 के इस्माइल फारूकी के मुकदमे में दिए गए फैसले पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत नहीं है,और इस मामले को बड़ी सवैंधानिक पीठ को स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 1994 के इस्माइल फारूकी के मुकदमे में दिए गए फैसले पर पुनर्विचार याचिका को ख़ारिज कर दिया है और कहा कि अयोध्या विवाद पर फैसला तथ्यों के आधार पर होगा, इसके लिए पिछले फैसले प्रासंगिक नहीं होंगे।

अयोध्या-नमाज़ केस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 2:1 के मुकाबले पिटीशन को ख़ारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बड़ी सवैंधानिक पीठ को स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया है।

सुप्रीम अयोध्या मामले की सुनवाही 29 में शुरू करेगा ।


क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने 1994 के फैसले में ?
1994 में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने फैसला दिया था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का जरुरी अंग नहीं है,और नमाज़ कही भी पढ़ी जा सकती है और इसके साथ ही राम जन्मभूमि को यथास्थिति में बरकरार रखने का आदेश दिया था, ताकि हिंदू धर्म के लोग वहां पूजा कर सकें। अब कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि क्या 1994 वाले फैसले पर पुनर्विचार की ज़रूरत है या नहीं। कोर्ट ने 20 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखा था। बता दें कि टाइटल सूट यानि राम मंदिर पर फैसले से पहले ये फैसला काफी मत्वपूर्ण हो सकता है।


2010 में क्या फैसला आया था?
याद रहे की 1994 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने कहा था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का जरुरी अंग नहीं है। 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए एक तिहाई हिंदू, एक तिहाई मुस्लिम और एक तिहाई रामलला को दिया था।




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