महर्षि चरक - भरतीय औषधि विज्ञान के जनक

  • 161 Views
  • 6 Likes
  • August 28, 2018 4:42 PM
personality

father of ancient Indian medicine system
Charak - Symbolic image


प्राचीन काल में जब चिकित्सा विज्ञान की इतनी प्रगति नहीं हुई थी, गिने-चुने चिकित्सक ही हुआ करते थे उस समय चिकित्सक स्वयं ही दवा बनाते ,शल्य चिकित्सा और रोगों का परीक्षण करते थे।
तब आज जैसी प्रयोगशालाएं ,परीक्षण यंत्र व चिकित्सा सुविधाऐं नहीं थीं फिर भी प्राचीन चिकित्सकों का ज्ञान व चिकित्सा, स्वास्थ्य के लिए अति लाभकारी थी। करीब 2000 वर्ष पूर्व भारत में ऐसे ही चिकित्सक चरक हुए।

ऐसा माना जाता है कि वह कुषाण राज्य के राजवैद्य थे कुछ लोग इनको बुद्ध के समकालीन मानते हैं, इन्होंने आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में शरीर विज्ञान, निदान शास्त्र और भ्रूण विज्ञान पर चरक संहिता नामक पुस्तक लिखी । ऐसा मत है कि प्राचीन चिकित्सक आत्रेय के निर्देशन में बृहत्संहिता ईसा से 800 वर्ष पूर्व लिखी थी। संहिता को चरक ने संशोधित किया जो चरक संहिता के नाम से प्रसिद्ध हुई । इस पुस्तक का अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ है इस पुस्तक में रोग निरोधक और रोग नाशक दवाओं का मुख्यतः उल्लेख है ।

चरक वैशंपायन के शिष्य थे इनके चरक संहिता ग्रंथ में पश्चिम उत्तर प्रदेश का ही अधिक वर्णन होने के कारण चरक इसी क्षेत्र के निवासी जान पड़ते हैं । कहा जाता है कि चरक को शरीर में जीवाणुओं की उपस्थिति का ज्ञान था। परंतु इस विषय पर उन्होंने अपना कोई मत व्यक्त नहीं किया है चरक को आनुवंशिकी के मूल सिद्धांतों की भी जानकारी थी ।
चरक ने अपने समय में यह मान्यता दी थी कि बच्चों में अनुवांशिक दोष जैसे अंधापन, लंगड़ापन जैसी विकलांगता माता या पिता की किसी कमी के कारण नहीं बल्कि शुक्राणु की त्रुटि के कारण होती थी यह मान्यता आज एक स्वीकृत तथ्य है ।

उन्होंने शरीर में दांतों सहित 360 हड्डियों का होना बताया था। चरक का विश्वास था कि हृदय शरीर का नियंत्रण केंद्र है । चरक ने शरीर रचना और विभिन्न अंगों का अध्ययन किया।




Leave a Comment:



Comments:


Avatar

Nitya kishore August 19, 2018 8:32 PM

Pride of our nation


Avatar

प्रियंका August 25, 2018 7:14 AM

तभी तो भारत को विश्व गुरु कहा जाता था।