दंगा,कर्फ्यू और फ्लैगमार्च

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  • August 12, 2018 1:44 AM
poems

कर्फ्यू चलता रहा, फ्लैग मार्च होती रही।
क्रूरता के गलियारों में, मानवता रोती रही।

रामो रहीम की बेदी को, सुलगाती रही साजिशें।
मेरे चमन की फ़िज़ा, कालिख मई होती रही।

जलती रही बस्तियाँ, आसमा तपता रहा।
लाचार बन जिंदगी, मौत को ढोती रही।

देखते ही देखते, लाशों के बदल छा गए।
बेबस विधवा रात, चाँद संग रोती रही।

हर मजहवी से, पूछेगा प्रश्न इतिहास ये।
मंदिर मस्जिदों के आहतों में, कब्र क्यों खोदी गयी।




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Comments:


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Nitya kishore July 22, 2018 7:51 PM

Super hit


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Gaurav July 22, 2018 9:32 PM

Superb


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Novendra sharma July 22, 2018 9:33 PM

Very good


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Bhoopendra Rawat July 22, 2018 9:49 PM

Good one


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Priyanka July 22, 2018 10:02 PM

Heart touching lines...bahut khub


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Boby July 23, 2018 2:08 PM

Super


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S kumar July 23, 2018 2:08 PM

Bahut achcha


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Boby parmar July 23, 2018 2:08 PM

Very good


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S kumar July 23, 2018 2:09 PM

Some romentic poem moment


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Ashok kushwah July 24, 2018 8:53 AM

Jia shri ram


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Awesome October 2, 2018 3:52 PM

सूपर