ईमानदारी का झंगा

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  • August 26, 2018 2:51 PM
poems

यदि आप पहनकर चलोगे ईमानदारी का पुराना झंगा,
तो घर में रहेगा दंगा,बच्चियां रहेंगी भूखी, बच्चा रहेगा नंगा।

और बीवी -
गांठ बांध लो,कमर कस लेगी
तुम्हें नंबर वन का मूर्ख कहेगी।

यहां तक तो तुम जहर पीलोगे,मर मर के जी लोगे,
बीवी को धमकाओगे ,बच्चों को आंख दिखाओगे।

मगर, आगे हाल क्या होगा? जब बेटी का ब्याह होगा।
तुम रिश्ता लेकर जाओगे, क्लीन बोल्ड क्रिकेटर की तरह पवेलियन वापस आओगे।

कोई भी तुम्हारी ईमानदारी पर ध्यान नहीं देगा,
तुम्हें पागल ,सनकी , मूर्ख , न जाने क्या क्या जमाना कहेगा।

दहेज का दैत्य तुम्हारे हर प्रस्ताव को धकियाते जाएगा ,
और धीरे-धीरे एक दिन तुम्हारा मनोबल टूट जाएगा ।

फिर भी यदि रिश्ता कर भी दिया, मकान या खेत गिरवी धर भी दिया ।
तो -
क्या गारंटी है तुम्हारी बिटिया सम्मान से जी पायेगी?
न जाने किस घड़ी दहेज़ की नागिन डस जायेगी।

बहुत हुआ तो -
तुम दो चार दिन आँसू बहा लोगे,
अपने शरीर को जर्जर बना लोगे।

क्या तुम ईमानदारी की इतनी कीमत चुका सकते हो?
बेटे बेटियों को जिंदगी भर जहर पिला सकते हो।

यदि हाँ -
तो भी
ईमानदारी के लिए तुम्हें याद नहीं किया जायेगा ।

कोई भ्रष्ट चापलूस ही ईमानदारी का पुरस्कार ले जायेगा।




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Comments:


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Nitya kishore August 26, 2018 2:53 PM

सटीक


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Nitya kishore August 26, 2018 2:57 PM

सटीक


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Manoj kumar lavania September 5, 2018 10:42 AM

बिल्कुल सही शब्द हैं


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Yogendra Verma September 5, 2018 10:57 PM

एकदम सही कहा आपने।


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Nekram September 6, 2018 6:30 AM

True words


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Nekram September 6, 2018 6:30 AM

True words


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Good September 15, 2018 9:27 PM

Agra